देहरादून: उत्तराखंड उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े एक फैसले ने राज्य के सबसे बड़े काॅलेज पर संकट मंडराने लगा है। ऐसा काॅलेज जिसने उत्तराखंड समेत देश के दूसरे राज्यों को तो बड़े नेता, अधिकारी और खिलाड़ी दिए ही हैं। साथ ही नेपाल और मॉरीशस को प्रधानमंत्री भी दिए हैं। राज्य के डीएवी पीजी काॅलेज से पढ़ने के बाद यहां के छात्रों ने देश और दुनिया में नाम कमाया है। यह राज्य के बड़े काॅलेजों में से एक है।

सरकार ने शिक्षक अशासकीय कॉलेज का अनुदान खत्म करने का फैसला लिया है। हालांकि इसको लेकर अलग से कोई आदेश जारी नहीं किया गया है, लेकिन जो संशोधन किया गया है, उसमें अनुदान को कहीं जिक्र ही नहीं किया गया है। सरकार के इस फैसले का शिक्षक विरोध कर रहे हैं।

शिक्षक व कर्मचारियों को डर है कि कॉलेज का अनुदान बंद करने से कॉलेज के अस्तित्व पर संकट मंडरा सकता है। उनकी मांग है कि अनुदान को जारी रखा जाए। बता दें कि अनुदान जारी रखने की मांग को लेकर डीएवी, डीबीएस और एमकेपी पीजी कॉलेज में शिक्षक-कर्मचारी रोजाना धरना दे रहे हैं।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार शिक्षकों का कहना है कि सरकार अशासकीय कॉलेजों पर श्रीदेव सुमन विवि से संबद्ध होने के लिए लिखित में सिफारिश देने की मांग कर रही है। जबकि, कॉलेजों की इसमें कोई भूमिका नहीं है। सरकार किसी भी अशासकीय कॉलेज को पूर्व की भांति किसी भी विवि से संबद्ध करने के लिए स्वतंत्र है।

सरकार कई बार कॉलेजों पर अन्य विवि से संबद्ध न होने का गलत आरोप लगा रही है। डीएवी पीजी कॉलेज में वर्तमान में 140 शिक्षक-कर्मचारी कार्यरत हैं। शिक्षकों पर लगातार काम का दबाव बढ़ा है। जबकि, करीब 55 प्रतिशत स्टाफ (नॉन टीचिंग) के पद खाली हैं। वहीं, 12 से 15 कर्मचारी ऐसे भी हैं जिन्हें कई महीने से वेतन नहीं मिल रहा है।

कॉलेज ने लोकेन्द्र बहादुर चंद, पूर्व प्रधानमंत्री नेपाल- शिवसागर रामगुलाम, मॉरीशस के पूर्व पीएम- ब्रह्म दत्त, पूर्व केंद्रीय मंत्री- ब्रह्म सिंह वर्मा, पूर्व न्यायाधीश- कर्नल (रिटा.) अजय कोठियाल- बछेंद्री पाल, माउंट एवरेस्ट फतेह करने वाली पहली भारतीय महिला- नित्यानंद स्वामी, उत्तराखंड के पहले सीएम- प्रेमचंद अग्रवाल, विधानसभा के वर्तमान अध्यक्ष- हीरा सिंह बिष्ट, पूर्व कैबिनेट मंत्री- शहीद मेजर विभूति धौण्डियाल (पिछले साल शहीद हुए) दिए हैं इनके अलावा की बड़े खिलाडी भी यहां से निकले हैं।

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