हल्द्वानी (योगेश शर्मा) : सरकार को सबसे ज्यादा राजस्व देने वाली कुमाऊं की सबसे बड़ी गौला और नंधौर नदी, जिससे प्रदेश सरकार को हर साल करोड़ों का राजस्व मिलता है। इन नदियों में काम करने के लिए हर साल यूपी बिहार सहित कई राज्यों से हजारों की संख्या में मजदूर आते हैं। नदी में होने वाले खनन के काम से ये मजदूर अपने परिवार की आजीविका के साथ-साथ प्रदेश सरकार को भी करोड़ों का राजस्व देते हैं, लेकिन नदियों में काम करने वाले मजदूर ठंड से बेहाल हैं। मजदूरों की सुविधाओं के लिए बनाई गई वेलफेयर सोसाइटी में करोड़ों रुपए डंप पड़े हुए हैं।

वन विकास निगम के अधिकारी इस फंड पर कुंडली मारकर बैठे हुए हैं। पिछले दो-तीन सालों से मजदूरों को मिलने वाले कंबल, जूते, पॉल्यूशन मास्क सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही है। ऐसे में बाहर से आकर नदियों में खनन करने वाले मजदूर ठंड में ठिठुर कर काम करने को मजबूर है। गौरतलब है कि कुमाऊं की गौला, नंधौर और कोसी नदी सहित कई अन्य नदियों में इस समय खनन कार्य चल रहा है। इन नदियों में 12 हजार से अधिक मजदूर काम कर रहे हैं। खनन का काम करने वाले अधिकतर मजदूर उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड सहित कई प्रदेशों के हैं, जो हर साल यहां आकर मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं।

साथ ही इन मजदूरों की बदौलत प्रदेश सरकार की झोली में हर साल करोड़ों का राजस्व जाता है। वहीं प्रदेश सरकार द्वारा इन मजदूरों के हितों के लिए वेलफेयर सोसाइटी और खनन न्यास की स्थापना की गई है, जिसके माध्यम से इन मजदूरों के लिए पीने के पानी, शौचालय की व्यवस्था, ठंड से बचने के लिए कंबल, जूते, मास्क, ग्लव्स, मेडिकल कैंप, सहित कई अन्य जरूरी व्यवस्था की जा सके, लेकिन खनन में लगी कार्यदाई संस्था वन विकास निगम के अधिकारी इन मजदूरों को किसी तरह की सुविधा उपलब्ध कराने की जहमत तक नहीं उठा रहे है।

यहां तक की वेलफेयर सोसाइटी में करोड़ों रुपए डंप पड़े हुए हैं, लेकिन अधिकारी फंड पर कुंडली मारकर बैठे हुए हैं। मजदूरों का कहना है कि उनको हर साल सुविधा उपलब्ध कराने के नाम पर उनका रजिस्ट्रेशन किया जाता है, लेकिन पिछले दो-तीन सालों से सुविधा के नाम पर उनको कुछ भी नहीं मिल पा रहा। मजदूरों का कहना है कि ठंड खत्म होने को है, लेकिन अभी तक सरकार द्वारा कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है। वहीं, जिलाधिकारी सविन बंसल ने बताया कि कार्यदाई संस्था वन विकास निगम को निर्देशित किया जा चुका है कि मजदूरों को मिलने वाली सुविधा उपलब्ध कराई जाए। अगर कार्यदाई संस्था द्वारा किसी तरह की कोई लापरवाही बरती जा रही है, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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