हल्द्वानी : उत्तराखंड में पलायन सबसे बड़ा गंभीर मुद्दा है। गांव के गांव खाली हो रहे है। लोग शहरों की ओर रुख कर रहे हैं और गांव वीरान हो रहे हैं। अब गांवों को देख आंखों में आंसू आ जाते हैं। कभी जिस आंगन में हम खेले कूदे उन आंगनों में लंबी लंबी गाजर घास जमी है। दरवाजे टूटे तो किसी में ताले लटके हैं। रोजगार न होने के कारण और बेहतर शिक्षा न मिलने के कारण लोग शहरों की ओर रुख कर रहे हैं। वहीं अब एक रिपोर्ट में चौकाने वाला हैरान कर देने वाला खुलासा हुआ है।

जी हां आयोग से मांगी गई सूचना के बाद इस बात का खुलासा हुआ है कि पिछले 10 सालों में उत्तराखंड से 502707 लोगों ने पलायन किया है। आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत गोनिया द्वारा मांगी गई आरटीआई से मिली जानकारी में पता चला है की पहाड़ में गांव के गांव खाली हो रहे हैं, 10 सालों में पांच लाख लोग शिक्षा, स्वास्थ्य रोजगार तथा अन्य सुविधाओं के अभाव में गांव छोड़कर शहरी इलाकों में चले गए, गांव के घरों में ताले लटके हैं और जमीन बंजर पड़ी है लेकिन स्वास्थ्य सुविधाएं, रोजगार और सड़क इनका प्रमुख कारण है, टिहरी गढ़वाल के 934 गांव और अल्मोड़ा जनपद के 1022 गांव रोजगार के लिए पलायन कर चुके हैं। यही हाल राज्य के अन्य जिलों का भी है, सरकार द्वारा अगर जल्द पहाड़ों में सुविधाओं को नहीं बढ़ाया गया तो हालात और भी बुरे हो सकते हैं हालांकि सरकार पलायन रोकने के दावे तो करती है लेकिन हालिया हकीकत कुछ और है।

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