ऊधमसिंह नगर (मोहम्मद यासीन): सरकारी प्राथमिक विद्यालयों के विलीनीकरण के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक के बाद भी जिलाधिकारी ऊधमसिंह नगर द्वारा जिले में विभिन्न विद्यालयों का विलीनीकरण कर दिए जाने पर हाईकोर्ट में जनहित याचिकाकर्ता किच्छा निवासी डॉ. गणेश उपाध्याय ने खटीमा ब्लॉक के चांदपुर, दियां, मझोला, बिरिया और गुर्जर बस्ती केे राजकीय प्राथमिक विद्यालयों का स्थलीय निरीक्षण किया।

इस दौरान डॉ. गणेश उपाध्याय ने उपस्थित ग्रामीणों और बच्चों के अभिभावकों, विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यों से उनके विद्यालय के विलीनीकरण पर विचार विमर्श किया। अभिभावकों ने विद्यालय विलीनीकरण पर कड़ी नाराजगी जताई। ग्रामीणों का कहना था कि हाईकोर्ट की विलीनीकरण पर रोक के आदेश के बावजूद राजकीय प्राथमिक विद्यालय चांदपुर, राजकीय प्राथमिक विद्यालय मझोला और राजकीय प्राथमिक विद्यालय गुर्जरबस्ती का विलीनीकरण कर दिया गया।

उत्तराखण्ड सरकार और जिलाधिकारी ऊधमसिंह नगर की मनमानी के कारण विद्यालयों को बन्द कर दिया गया। विद्यालयी शिक्षा सचिव के द्वारा 2017 में निदेशक प्रारम्भिक शिक्षा को जारी आदेश में स्पष्ट लिखा गया है कि आरटीई के मानकों के अनुुसार 1 किमी की दूरी के अन्तर्गत प्राथमिक विद्यालय उपलब्ध होने की स्थिति में ही 10 या 10 छात्र संख्या से कम वाले राजकीय प्राथमिक विद्यालयों का विलीनीकरण किया जा सकता है। लेकिन, यहां डीएम ने 2 से 4 किमी दूर स्थित 10 छात्रों से अधिक छात्र संख्या वाले राजकीय प्राथमिक विद्यालयों का विलीनीकरण कर दिया। यह शिक्षा के अधिकार अधिनियम-2009 के अन्तर्गत विद्यालय स्थापना से सम्बन्धित प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है।

विलीन हुए राजकीय प्राथमिक विद्यालय चांदपुर में 15, गुर्जरबस्ती में 23 छात्र होने के बावजूद विलीनीकरण किया गया, जिसके कारण मासूम नौनिहालों ने विद्यालय जाना छोड़ दिया है। ये छोटे-छोटे बच्चे कई किमी दूर के विद्यालयों में जाकर पढ़ने जाने मे असमर्थ है। ऐसे में उनके पास स्कूली पढ़ाई छोड़ने के अतिरिक्त कोई और रास्ता नही है। डॉ. गणेश उपाध्याय ने कहा कि वो डीएम के खिलाफ अवमानना याचिका दायर करेंगे।

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