देशभर से सभी टोल प्लाजा पर आज से फास्टैग की शुरुआत कर दी गई है। अगर वाहन बिना फास्टैग के किसी टोल प्‍लाजा से गुजरता है तो ऐसी स्थिति में उसे निर्धारित से दोगुना भुगतान करना पड़ेगा। हालांकि दोपहिया वाहनों को इससे छूट दी गई है।

आपको बता दें कि फास्टैग की शुरुआत 2016 में हुई थी। यह टोल प्लाजा पर शुल्क का भुगतान इलेक्ट्रॉनिक तरीके से करने की सुविधा है। फास्टैग को अनिवार्य किए जाने के बाद टोल प्लाजा पर वाहनों को रुकना नहीं पड़ेगा और टोल शुल्क का भुगतान इलेक्ट्रॉनिक तरीके से हो जाएगा। बता दें कि सड़क यातायात और राजमार्ग मंत्रालय ने ये फैसला किया है 15-16 फरवरी का आधी रात से सभी नेशनल हाईवे फास्टैग वाले हो जाएंगे। यानी कैश में टोल फीस वसूलना बंद कर दिया जाएगा। सवाल ये है कि अगर फिर की कोई कैश देता है तो क्या? नेशनल हाईवे फी रूल्स 2008 के मुताबिक जिस गाड़ी पर फास्टैग नहीं होगा या वैलिड फास्टैग नहीं होगा उसे टोल फीस की दोगुना फीस का भरनी होगी।

क्या है फास्टैग?

फास्टैग एक प्रीपेड टैग है जो टोल शुल्क में स्वत: कटौती को सक्षम बनाता है और वाहन को बिना लेन-देन के लिए रूके टोल प्लाजा से गुजरने की अनुमति देता है। टोल प्लाजा पर सिस्टम उपयोगकर्ता के खाते से भुगतान में कटौती करने के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) तकनीक का उपयोग करता है।रीडर वाहन के 25 मीटर दूर होने पर टोल प्लाजा पर कार्ड का पता लगाता है।

कैसे खरीदें फास्टैग

लोगों की सुविधा के लिए टोल प्लाजा पर विभिन्न बैंकों के एजेंट व एनएचएआई की तरफ से काउंटर लगाए गए हैं। लोग अपने वाहन की आरसी व ड्राइविंग लाइसेंस अथवा आधार कार्ड दिखाकर हाथों हाथ फास्टैग खरीद सकते हैं। गत एक वर्ष से करीब 70 प्रतिशत वाहन फास्टैग की मदद से डिजिटली तरीके से टोल का भुगतान कर रहे हैं। फास्टैग की शुरुआत 2016 में हुई थी। यह टोल प्लाजा पर शुल्क का भुगतान इलेक्ट्रॉनिक तरीके से करने की सुविधा है। फास्टैग को अनिवार्य किए जाने के बाद टोल प्लाजा पर वाहनों को रुकना नहीं पड़ेगा और टोल शुल्क का भुगतान इलेक्ट्रॉनिक तरीके से हो जाएगा।

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