पुलिस के कई मानवीय और अमानवीय चेहरे आम जनता के सामने आए. लॉकडाउन में जहां पुलिस ने दरियादिली दिखाते हुए गरीबों की मदद की तो कहीं गरीबी औऱ बुढापे का लिहाज न करते हुए घूस मांगी गई। जी हां मामला यूपी के  कानपुर के चकेरी थाना क्षेत्र की सनिगवां चौकी पुलिस का है जहां पुलिस का शर्मसार कर देने वाला चेहरा सामने आया है। लेकिन दूसरी तरफ डीआईजी का मानवीय चेहरा भी सामने आया है।

गाड़ी और पेट्रोल के नाम पर बुजुर्ग से पैसे मांगे

बता दें कि सनिगवां क्षेत्र निवासी एक गरीब दिव्यांग बुजुर्ग महिला की बेटी एक महीने पहले लापता हो गई थी। बुजुर्ग ने बेटी को ढूंढा लेकिन कहीं नहीं मिली। वहीं सोमवार को बुजुर्ग महिला शिकायत लेकर चकेरी थाने पहुंची तो पुलिस दारोगा ने गाड़ी और पेट्रोल के नाम पर बुजुर्ग से पैसे मांगे। बुजुर्ग महिला ने भीख मांग कर कैसे करके पैसे जुटाए औऱ 12 हजार रुपये पुलिस को दिए लेकिन बेटी को फिर भी ढूंढ नहीं पाए।

दारोगा निलंबित, डीआईजी का मानवीय चेहरा आया सामने

वहीं इसके बाद पीड़िता ने अपनी शिकायत डे अफसर सीओ कलक्टरगंज गीतांजलि सिंह को दर्ज कराई थी। वह बाहर बैठी ही थीं कि तभी डीआईजी वहां से निकले और वो बुजुर्ग विकलांग महिला को देखकर रुक गए। उन्होंने उनसे पूरा मामला पूछा। इसके बाद अपनी फ्लीट की गाड़ी से वृद्धा को घर भिजवाया। डीआईजी ने बुजुर्ग को आश्वासन दिया कि जिन पुलिसकर्मियों ने लापरवाही बरती है या पैसे लिए हैं उन पर भी कार्रवाई की जाएगी। वहीं प्रारंभिक जांच में दोषी पाए जाने पर डीआईजी ने मंगलवार को सनिगवां चौकी प्रभारी राजपाल सिंह औऱ जांच अधिकारी अरुण कुमार को निलंबित कर दिया। वहीं मामले में पुलिस ने चार संदिग्ध लोगों को मंगलवार को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है।  डीआईजी डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने बताया कि युवती का पता लगाने के लिए सर्विलांस व अन्य टीमों को लगाया गया है। साथ पुलिसकर्मियों पर लगे आरोप की जांच कराई जा रही है।

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