क्यूआर कोड यानी कि क्विक रिस्पॉन्स कोड जिससे हम आसानी से मात्र स्कैन कर पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं। किसी भी खरीदे गए सामान की पेमेंट कर सकते हैं..लेकिन इसकी राह जितनी आसान है उतनी ही ये मुश्किल भी खड़ी कर सकता है। जी हां क्यूआर कोड इसके नाम पर ठगी भी की जा रही है। हाल ही में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की बेटी से इस तरह की ठगी की गई है। आपको बता दें कि क्यूआर कोड एक तरह से तुरंत काम निपटाने का तरीका है। कहीं सामान के पैसे देने हों या कोई भी पेमेंट करनी हो क्यूआर कोड के जरिए झट से हम पैमेंट कर देते हैं लेकिन बता दें कि फट से आपका अकाउंट खाली भी हो सकता है.

आपने अक्सर दुकानों में देखा होगा कि कोड संकेत अक्षरों के रूप में होता है जिसे हम खुद नहीं पढ़ सकते. इसे पढ़ने के लिए खास उपकरण की जरूरत होती है या उपकरण में लगे स्कैनर की मदद से इसे पढ़ा जा सकता है. यह एक प्रकार का मैट्रिक्स बारकोड है जिसमें कई तरह की सूचनाएं मौजूद होती हैं. क्यूआर कोड सबसे पहले मोटर वाहन उद्योग के लिए शुरू किया गया था, लेकिन आज इसका दायरा विस्तृत है. शायद ही कोई सेक्टर बचा हो जहां इसका इस्तेमाल नहीं हो रहा है. ज्यादा इस्तेमाल होने से इसमें फर्जीवाड़े की घटनाएं भी बढ़ गई हैं.

ऐसे होती है क्यूआर कोड से ठगी

फर्जीवाड़ा करने लोग मोबाइल पर मैसेज के जरिये क्यूआर कोड भेजते हैं या आपके कंप्यूटर पर ऐसे मैसेज भेजकर झांसा दिया जाता है. इसमें स्कैन करने का लालच दिया जाता है. कई जगह ऐसी घटना हो चुकी है जिसमें अनजान क्यूआर कोड का स्कैन करते ही अकाउंट खाली हो जाता है. कई बार सामान की पेमेंट के नाम पर कहा जाता है कि उल्टा उनके पैसे कट गए और पैसे वापस मांगने के नाम पर आपको क्यूआर कोड़ भेजा जाता है और आपको कहा जाता है कि उनके पैसे इसमे बार को़ड के जरिए वापस दें. बस आप क्यूआर कोड को स्केन करेंगे और आपका अकाउंट खाली हो जाएगा। यह धोखाधड़ी का नया तरीका है. इसलिए सरकार ने इससे बचने का सुझाव दिया है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक क्यूआर की पूरी जानकारी न हो, पीओएस भी भरोसेमंद हों तभी क्यूआर कोड स्कैन करना चाहिए. अन्यथा इसका खतरा बड़ा हो सकता है.

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