चमोली: गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के भूगर्भ विज्ञानी डा. नरेश राणा ने दावा किया है कि आपदा प्रभावित चमोली जिले में ऋषि गंगा के मुहाने पर झील बन गई है. जिस स्थान पर झील बनी हुई है उस स्थान पर जाकर डा. राणा ने जानकारी जुटाई है. उन्होंने इसकी रिपोर्ट विवि प्रशासन को भी सौंप दी है. डा. राणा ने बताया कि मलबे से बनी झील के कारण ऋषि गंगा अवरुद्ध हो गई है, जिससे भविष्य में फिर ऋषि गंगा में बाढ़ के हालात बन सकते हैं. उन्होंने इसका वीडियो भी जारी किया है.

इस बात की पुष्टि देहरादून स्थित वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिकों ने की है. इस संस्थान के साइंटिस्ट्स ने हेलिकॉप्टर से ऋषिगंगा के ऊपरी इलाकों का सर्वे किया. इसके बाद उन्हें वहां पर एक नई झील बनती हुई दिखाई दे रही है. वाडिया इंस्टीट्यूट के साइंटिस्ट्स के मुताबिक इस झील का आकार 10 से 20 मीटर है.

ज्यादा ऊंचाई से सर्वे करने की वजह से झील का सही आकार पता नहीं चल पाया लेकिन अगर यह झील आकार में बढ़ती रही और बाद में टूटी तो बड़ा हादसा हो सकता है. इसलिए इसे पहले ही तोड़कर इसका पानी हटाना होगा. वाडिया संस्थान के साइंटिस्ट ये मानते हैं कि संभवतः हैंगिंग ग्लेशियर टूटने के बाद जो मलबा नीचे आया है, उसकी वजह से ये झील बनी हो.

डीआईजी एसडीआरएफ रिद्धिम अग्रवाल ने कहा कि संभावना है कि तपोवन क्षेत्र के पास रैणी गांव के ऊपर पानी जमा हो रहा है। कई हवाई सर्वे किए गए हैं। आज आठ सदस्यीय एसडीआरएफ टीम को स्थिति का आकलन करने के लिए भेजा गया है। आकलन के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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