देहरादून : रविवार को चमोली के तपोवन औऱ जोशीमठ में आई आपदा के बाद से ऋषिगंगा के जलागम क्षेत्र रोंगथी पर शासन और वैज्ञानिकों द्वारा नजर रखी जा रही है। बता देें कि जल प्रलय के बाद वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान ने खुलासा किया था कि ऋषिगंगा के मुहाने पर मलबा जमने से पानी जमा हो रहा है जिससे एक बार फिर से जल प्रलय का खतरा बढ़ रहा है। जिसके बाद कई संस्शानों द्वार इसका शोध किया गया और एसडीआरएफ की 8 टीमें रेकी के लिए ऋषिगंगा के मुहाने पर भेजी गई। वहीं जानकारी मिली है कि एसडीआरएफ की टीम वहां पहुंच चुकी है जहां से राहत भरी खबर सामने आई है।  इसकी जानकारी डीजीपी अशोक कुमार ने दी है।

डीजीपी अशोक कुमार ने बताया कि एसडीआरएफ की टीम शुक्रवार शाम को झील के करीब पहुंच गई है। टीम ने जो जानकारी दी है उसके मुताबिक झील रिसनी शुरू हो गई है। इसलिए खतरे की बात नहीं है। उन्होंने बताया कि टीम ने जो फोटो भेजी हैं, उसमें झील करीब 350 मीटर लंबी नजर आ रही है। एक छोर से इसमें रिसाव भी हो रहा है। इस कारण खतरे की बात नहीं है। डीजीपी ने बताया कि एसडीआरएफ टीम शनिवार दोपहर तक रैंणी गांव लौट आएगी। इसके बाद और जानकारी मिल पाएगी।

आपको बका दें कि वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान ने रैंणी गांव के ऊपर ऋषिगंगा के जलागम क्षेत्र रोंगथी में एक विशाल झील बनने का खुलासा किया था। संस्थान ने इसकी जानकारी राज्य सरकार और चमोली जिला प्रशासन को दी थी जिससे एक बार फिर से डर का माहौल बन गया।। संस्थान के निदेशक का कहना है कि झील से पानी की निकासी भी नहीं हो रही है, जो खतरनाक हो सकता है। वाडिया संस्थान के निदेशक डॉ. कलाचंद सांई ने बताया कि रैणी, तपोवन इलाके में आपदा के कारणों का वैज्ञानिक विश्लेषण करने गई उनकी टीम ने झील बनने की जानकारी दी है। बताया जा रहा है कि इस झील का आकार काफी बड़ा है। टूटने की स्थिति में झील खतरनाक हो सकती है। जिसके बाद एसडीआरएफ की 8 टीमें वहां भेजी गई जहां से राहत भरी खबर सामने आई है।

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