देहरादून: शराब राज्य के राजस्व को सबसे बड़ा स्रोत है। सबसे अधिक राजस्व आबकारी विभागा ही राज्य को देता है। ऐसे में इस विभाग को संचालित करने के लिए बेहतर नीति और उस अमल करना बहुत जरूरी है। त्रिवेंद्र सरकार ने नई आबकारी नीति बनाई और उसको सही ढंग से धरातल पर भी उतारा। उसका असर भी नजर आ रहा है।

पहले चरण में 100 फीसद राजस्व के साथ ही 80 फीसदी शराब ठेके उठ गए हैं। मौजूदा वित्तीय वर्ष के साथ ही 202122 के लिए भी राजस्व सुरक्षित हो गया है। ऊधमसिंह नगर और अल्मोड़ा जिलों को छोड़कर अन्य सभी जिलों में राजस्व निर्धारित लक्ष्य से अधिक हो गया है। पिछले सालों में इस तरह का रिकाॅर्ड पहली बार बना है। राज्य की नई आबकारी नीति में कोटा कम करने दो वर्ष के लिए ठेका देने व राजस्व भी सुरक्षित रहे का फार्मूला नीति के मुताबिक सटीक साबित हुआ है।

नीति के बाद से ही पाई पाई राजस्व के लिए चिंतित सचिव आबकारी सचिन कुर्वे ने इसके लिए सभी अफसरो को बधाई भी दी है। पहाड़ से लेकर मैदान तक हर जिले ने अपने तय राजस्व को पार या उसके सापेक्ष पहुंच गया है। अल्मोड़ा उधनसिंघनगर हलांकि अभी पीछे है।

जिला               राजस्व
चम्पावत        61 करोड़
चमोली          83 करोड़ 2 लाख
बागेश्वर        47 करोड़ 60 लाख
उत्तरकाशी     51 करोड़ 89 लाख (6 दुकानंे बाकी)
रुद्रप्रयाग       68 करोड़
नैनीताल       285 करोड़
(अन्य आंकड़े मिलने बाकी…)

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