देहरादून : पूर्व सीएम हरीश रावत सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं। हरदा ने इस बार सोशल मीडिया के जरिए सरकार की योजना पर तंज कसा और एक पोस्ट लिखकर सोशल मीडिया पर शेयर की। बता दें कि बीते दिनों हुई त्रिवेंद्र सरकार की कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री ने घसियारी कल्याण योजना को मंजूरी दी जिस पर हरदा ने तंज कसा।

हरीश रावत की पोस्ट

हरीश रावत ने लिखा कि मैं भी आम उत्तराखंडी की तरीके से घसियारी का बेटा हूं और मैं खुद भी घसियार रहा हूं अपने भाई के साथ, माँ घास काटती थी और हम उसको बांध करके घर लाते थे। त्रिवेंद्र सिंह जी घसियारी के सर से बोझ हटाना चाहते हैं, जब मैंने कैसे हटाएंगे उस व्यवस्था को देखा तो मुझे बड़ी जोर से हंसी आयी, क्योंकि कालसी में चाटन भेली जो भूसे और घास, गुड़ आदि का समिश्रण करके बनाई जाती है, वो उसके बेचने की व्यवस्था को और व्यापक करना चाहते हैं, अच्छी बात है। लेकिन इससे बोझ हटेगा नहीं, जब घास ही नहीं है, जंगलों में घास के लिए जाते थे उस पर प्रतिबंध हो गया है, पहले जाड़ों में हमारी भैंसें मालू के पत्ते खाती थी, इसलिये जब मुझे मौका मिला मैंने मालू, तिमला, भिमल, गेठी आदि चारा प्रजाति के वृक्षों पर 300 की बोनस राशि “मेरा वृक्ष-मेरा धन योजना” के तहत प्रारम्भ की थी जिसे घसियारी के कल्याण के लिये सोचने वाली, वर्तमान सरकार ने बंद कर दिया है। मैंने, दूध पर बोनस की योजना शुरू की और महिला दुग्ध समितियों को प्रोत्साहन दिया, आज वो प्रोत्साहन भी केवल हवा में है। मैंने, गंगा-गाय योजना और मुख्यमंत्री विधवा बकरी पालन योजना शुरू की, आज ये योजनाएं भी समाप्त कर दी गई हैं। मगर मुख्यमंत्री जी को घसियारी याद आ रही है, बहरहाल मैं संघर्ष करूंगा कि घसियारी इसका सर्वेक्षण करवा करके उनको पेंशन योजना के दायरे में लाऊं। यूं हमने घसियारी के कष्ट को देखते हुये “तीलू रौतेली पेंशन” योजना प्रारंभ की थी जो असहाय महिलाओं के लिए थी, उस योजना का विस्तार सार्वभौम तरीके से सब घसियारी #महिलाओं के लिये किया जाय, यह मेरा अगला लक्ष्य होगा।

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