ऋषिकेश: एम्स के स्त्री रोग विभाग में पीएचडी स्कॉलर ट्विंकल के दोनों हाथ नहीं हैं। बावजूद वह लैपटॉप, स्मार्टफोन, पैन आदि बखूबी चला लेती हैं। लिखने का काम भी स्वयं करती हैं। हां उनको नित्य कर्मों के लिए हमेशा एक सहायिका पर निर्भर रहना पड़ता है। यकीन नहीं होता, लेकिन यह सच है। स्त्री रोग विभाग के प्रमुख् डाॅ. जया चतुर्वेदी का कहना है कि ट्विंकल केवल महिलाओं के लिए ही नहीं, हर किसी के लिए प्रेरणा हैं।

ट्विंकल हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गई थी। इससे ट्विंकल डोगरा ने अपने दोनों हाथ खो दिए, लेकिन जिंदगी में मायूसी को अपने ईद-गिर्द नहीं फटकने दिया। उन्होंने अपने हौसलों की उड़ान से अपनी जिंदगी को जिंदादिन बनाए रखा। यह उसीका नतीजा है कि आज ट्विंकल पूरे उत्साह से पीएचडी कर रही हैं। ट्विंकल पूरे ढाई साल तक बेड से उठ नहीं पाई थीं।

ट्विंकल आज एम्स ऋषिकेश के स्त्री रोग विभाग में पीएचडी कर रही हैं और खुश हैं कि संघर्ष की राह में आगे बढ़ते हुए एक साल बाद अपना सपना पूरा कर लेंगी। मूलरूप से पीलीभीत जिले की रहने वाली ट्विंकल का ससुराल कोटद्वार में है। वर्ष 2009 में विवाह हुआ था। ससुराल में इतनी खुश थी कि मानों सतरंगी इंद्रधनुष की तरह सारी खुशियां पा ली हों। फिर ढाई साल बाद बेटा हुआ और घर के आंगन में खुशियों का संसार बस गया।

बेटा जब नौ महीने का था, तो 6 जनवरी 2012 को ट्विंकल कपड़े सुखाने के लिए छत पर गई और छत के ऊपर से गुजर रही 33 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गई। ट्विंकल के दोनों हाथ झुलस गए और पैरों से भी धुआं निकलने लगा। परिवार वालों ने पहले उन्हें कोटद्वार अस्पताल पहुंचाया। कोटद्वार से मेरठ और मेरठ के बाद दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल। उन दिनों के दर्द को याद कर ट्विंकल आज भी सिहर उठती हैं। बर्न यूनिट में भर्ती ट्विंकल के पूरे शरीर में संक्रमण फैलते देख डॉक्टरों ने उसके दोनों हाथ काटने का निर्णय लिया।

21 दिन आईसीयू और तीन महीने तक अस्पताल के वार्ड में भर्ती रहने के बाद अगले ढाई साल तक उनका जीवन बिस्तर पर ही सांसें लेता रहा। इन सबके बावजूद ट्विंकल ने हार नहीं मानी। हौसला और जज्बा बनाए रखा। वर्ष 2014 में दिल्ली के एक अस्पताल में नकली हाथ लगवाए। इन हाथों की मदद से वह सामान्य कार्य करने लगीं। परिवार वालों की सहमति मिलने के बाद उन्होंने पढ़ाई जारी रखते हुए पीएचडी करने का निर्णय लिया। 2008 में योग से एमए कर चुकी ट्विंकल ने 2017 में राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की। पीएचडी के लिए उन्होंने एम्स ऋषिकेश को चुना। अब वह जुलाई 2019 से एम्स ऋषिकेश के स्त्री रोग विभाग में प्रसवोत्तर मानसिक स्वास्थ्य पर योग का प्रभाव विषय पर पीएचडी कर रही हैं।

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