उत्तराखंड में लॉकडाउन के दौरान देहरादून नगर निगम के जरिए सैनिटाइजेशन की खरीद को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। आरटीआई के जरिए मिली जानकारी के अनुसार नगर निगम ने देहरादून शहर में सैनिटाइजेशन के लिए सोडियम हाइपोक्लोराइड की खरीद खासे ऊंचे दामों पर की। सूत्रों की माने तो जिस फर्म से ये खरीद हुई उसके मालिक और देहरादून के मेयर सुनील उनियाल गामा के पुराने मित्रवत संबंध हैं।

RTI में हुआ खुलासा

दरअसल हाल में सूचना के अधिकार के तहत एक जानकारी सामने आई है। इस जानकारी में देहरादून नगर निगम के जरिए ‘आपदा में अवसर’ तलाशे जाने की पुष्टि हो रही है। कोरोना काल में देहरादून नगर निगम ने पूरे शहर में सैनिटाइजेशन कराने का ऐलान किया। इसके लिए बड़े पैमाने पर सोडियम हाइपोक्लोराइट की जरूरत थी। हिंदुस्तान दैनिक अखबार में छपी एक खबर के अनुसार आरटीआई के जरिए मिली सूचना बताती है कि शहर को सैनिटाइज करने के लिए नगर निगम के जरिए बड़े पैमाने पर सोडियम हाइपोक्लोराइट की खरीद की गई और वो भी बेहद ऊंचे दाम पर। नगर निगम की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार नगर निगम ने देहरादून के आफताब ट्रेडर्स से 60 रुपए प्रति किलो के हिसाब से सोडियम हाइपोक्लोराइट (1 फीसदी) खरीदा। खबरउत्तराखंड.कॉम के पास इस खरीद के बिल भी हैं। 17 मार्च 2020 की तारीख में आफताब ट्रेडर्स से बिल नंबर 226 काटा गया। इस बिल के अनुसार नगर निगम को 400 लीटर सोडियम हाइपोक्लोराइट की 60 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से आपूर्ति की गई। 24000 रुपए इस बिल का भुगतान भी 23 मार्च को चेक संख्या – 050716 के जरिए कर दिया गया।

आफताब ट्रेडर्स पर ‘मेहरबानी’

इसके बाद 20 मार्च 2020 को फिर एक बार 600 लीटर सोडियम हाइपोक्लोराइट की खरीद 60 रुपए प्रति लीटर की दर से हुई। ये खरीद भी आफताब ट्रेडर्स से की गई। इस बिल का भुगतार भी 23 मार्च को चेक द्वारा कर दिया गया। दिलचस्प ये है कि आरटीआई के जरिए नगर निगम ने इन बिलों की जो फोटो स्टेट कॉपी उपलब्ध कराई है उसमें एक ही चेक नंबर से दो अलग अलग अमाउंट की पेमेंट दिखाई गई है। दरअसल 20 मार्च का आफताब ट्रेडर्स ने नगर निगम को बिल संख्या 230 दिया। इस बिल की फोटो स्टेट कापी नगर निगम की ओर से उपलब्ध कराई गई है। इस बिल की कॉपी में भुगतान की जानकारी भी दी गई है। इसके अनुसार नगर निगम ने 23 मार्च 2020 को 36000 रुपए मूल्य का चेक संख्या 050716 आफताब ट्रेडर्स को दिया। जबकि नगर निगम ने 23 मार्च 2020 को 24000 रुपए का जो भुगतान किया उसकी चेक संख्या भी 050716 बताई गई है।

31 मार्च को आफताब ट्रेडर्स से 5550 लीटर सोडियम हाइपोक्लोराइट खरीदा गया। इसकी भी दर 60 रुपए प्रति लीटर थी। कुल बिल बना 333000 रुपए का। 3 अप्रैल को नगर निगम ने इस खऱीद का भुगतान भी चेक के जरिए कर दिया। हैरानी की बात ये है कि ऐसा समय था जब पूरे देश में लॉकडाउन लगा था। सभी कामकाज बंद हो गए थे। लेकिन ऐसे में भी ऑफताब ट्रेडर्स का भुगतान फटाफट होता रहा। नगर निगम ने लाखों रुपए की खरीद आफताब ट्रेडर्स से की।

खबरउत्तराखंड.कॉम के पास सोडियम हाइपोक्लोराइट की खरीद से जुड़े बिलों की कॉपी मौजूद है। इन बिलों में नगर निगन ने नवंबर 2020 तक सोडियम हाइपोक्लोराइड की खरीद की है। कुछ महीनों बाद नगर निगम ने ये खरीद ला थर्मो नाम की एक फर्म से की। इसमें उसे आठ रुपए दस पैसे के हिसाब से सोडियम हाइपोक्लोराइड की आपूर्ति की गई। नगर निगम के मुताबिक जून में सोडियम हाइपोक्लोराइड की खरीद के लिए टेंडर निकाला गया। हालांकि नगर निगम ने ये नहीं बताया कि पूरे देहरादून में सिर्फ आफताब ट्रेडर्स से ही कई महीनों तक पांच गुना दर पर सोडियम हाइपोक्लोराइड की खरीद क्यों हुई?

आफताब ट्रेडर्स की ओर से नगर निगम को दिया गया बिल
आफताब ट्रेडर्स से अप्रैल में लाखों की खरीद हुई।

अब ऐसे में सवाल उठता है कि एक ही शहर में एक ही सामान के रेट में इतना फर्क क्यों है? क्यों नगर निगम ने 8 रुपए 10 पैसे के सामान की खरीद 60 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से की? खबरें हैं कि इस पूरे ‘खेल’ में देहरादून के मेयल सुनील उनियाल गामा अहम किरदार में रहे। जिस आफताब ट्रेडर्स से लाखों रुपए मूल्य के सोडियम हाइपोक्लोराइड की खरीद की गई वो मेयर साहब का बेहद करीबी है। चूंकि मेयर साहब खुद पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के बेहद ‘खास’ रहें हैं। पूर्व सीएम त्रिवेंद्र की पसंद पर ही सुनील उनियाल गामा को मेयर का टिकट दिया गया था जबकि बीजेपी के कई बड़े और सक्रिय नेता मेयर बनने की राह देख रहे थे। ऐसे में मेयर साहब के इस खेल पर किसी अधिकारी के बोलने की हिम्मत भी नहीं हुई।

बाद में नगर निगम ने कम दाम पर नगर निगम को आपूर्ति की

हालांकि दिलचस्प ये है कि नगर निगम ने हिंदुस्तान दैनिक में समाचार प्रकाशित होने के बाद एक नोटिस जारी कर अखबार प्रबंधन से खबर का खंडन करने की मांग की है। हालांकि इसके बावजूद कई सवाल ऐसे हैं जो अनुत्तरित हैं। मसलन पूरे देहरादून में नगर निगम को सिर्फ आफताब ट्रेडर्स ही क्यों मिला? क्या आफताब ट्रेडर्स को काम देने से पहले किसी और आपूर्तिकर्ता से रेट लिए गए? क्या आफताब ट्रेडर्स के दिए गए रेट की बाजार भाव के हिसाब से जांच कराई गई?

क्या मेयर गामा और आफताब ट्रेडर्स के मालिकों के बीच पुराने मित्रवत संबंध हैं? कहीं ऐसा तो नहीं कि इन्ही संबंधों के तहत मेयर साहब ने आफताब ट्रेडर्स को व्यवसायिक लाभ पहुंचाया? लॉकडाउन में भी आफताब ट्रेडर्स का भुगतान पांच दिन से अधिक नहीं रुका जबकि अधिकतर बैंक बंद चल रहे थे?

The post EXCLUSIVE: लाखों का खेला, किसने खेला? मेयर गामा जवाब तो दीजिए first appeared on Khabar Uttarakhand News.





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