पौड़ी के सतबीर ने आग से न सिर्फ खुद को बल्की अपने भाी बहनों को भी बचाया. सतबीर के संघर्ष और साहस की तारीफ आज हर कोई कर रहा है। दरअसल हुआ यूं कि रविवार शाम पौड़ी गढ़वाल जिले के द्वारीखाल ब्लॉक में ग्राम सिमल्या का रहने वाला सतबीर अपनी 35 बकरियों को लेकर जंगल में था। साथ में चचेरी बहन किरन (11) और रिश्ते की बहन सिमरन (13) भी थी।

सतबीर ने बताया जंगल में दूसरी ओर आग लगी हुई थी, लेकिन जिस तरफ वो थे, वहां सब कुछ ठीक था। कुछ देर में उन्हें बकरियों को लेकर गांव लौटना था लेकिन तभी तेज हवा चलने लगी। सतबीर ने बताया कि वो भाई बहनों के साथ बातें कर रहा था कि उसे पता ही नहीं चला के वे लपटों से घिर चुके हैं। जब उन्होंने अपने सामने विकराल आग देखी तो सहम गए। सतबीर के साथ गई उशकी बहने रोने लगी, लेकिन सतबीर ने हिम्मत नहीं हारी। उसने तुरंत ही पेड़ों की हरी टहनियां तोड़ीं और आग बुझाना शुरू किया और लपटों से बाहर जाने का रास्ता बनयाा। उसने बहनों को सुरक्षित जगह पहुंचाया और इसके बाद सतबीर ने बकरियों की सोची लेकिन फिर भी आग से 5 बकरियों की जान चली गई, लेकिन सतबीर ने 30 बकरियों को बचा लिया गया। इस दौरान सतबीर काफी झुलस गया। उसके कपड़ों ने आग पकड़ ली थी। ऐसे में सतबीर  तेजी से करीब तीन सौ मीटर दूर नदी की ओर भागा। उसने  नदी में छलांग लगा दी। इस बीच घर पहुंची बहनों ने गांव में सूचना दी।

इसके बाद सारे गांव वाले मौके पर पहुंचे। सतबीर नदी से निकल कर तट पर लेटा हुआ था। गांव के लोग उसे एंबुलेंस से कोटद्वार स्थित बेस चिकित्सालय लाए। डॉक्टरों का कहना है कि सतबीर की हालत खतरे से बाहर है। बता दें कि सतबीर 11वीं कक्षा में पढ़ता है। पिता सहित पूरे गांव को सतबीर पर गर्व महसूस हो रहा है।

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