देहरादून: कोरोना मरीजों के इलाज में प्लाज्मा सबसे बड़ी जरूरत बन गई है। आॅक्सीजन के लिए तो लोग भटक ही रहरे हैं। प्लाज्मा के लिए भी डोनर खोज रहे हैं, लेकिन मिल नहीं पा रहे हैं। हालांकि लोगों की मदद के लिए पुलिस के अलावा कई सामाजिक संगठन भी जुटे हुए हैैं। कई युवा सोशल मीडिया के जरिए भी मुहिम चला रहे हैं। लेकिन, अब पुलिस ने प्लाज्मा की जरूरत को पूरा करने के लिए हर जिले प्लाज्मा बैंक बनाने की योजना बनाई है।

कोविड मरीजों के इलाज के लिए उत्तराखंड पुलिस हर जिले और बटालियनों में प्लाज्मा बैंक तैयार करेगी। इसके लिए आजा हर जगह एंटी बॉडी टेस्ट के लिए कैंप आयोजित किए जा रहे हैं। इसके बाद जरूरत पड़ने पर पुलिसकर्मी अपना प्लाज्मा दान कर लोगों की जान बचाएंगे। इस साल अब तक एक हजार से अधिक पुलिसकर्मी कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं। इनमें से ठीक होने के बाद कई पुलिसकर्मियों ने लोगों को प्लाज्मा दान कर उनकी जान भी बचाई है। इसके अलावा पिछले साल भी करीब 2000 पुलिसकर्मी कोरोना संक्रमित हुए थे। डीजीपी अशोक कुमार ने सभी जनपदों के पुलिस प्रभारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग की थी।

इस दौरान उन्होंने रविवार को सभी जगह हर जिले, पीएसी और आईआरबी में जवानों के लिए एंटी बॉडी टेस्ट कराने के लिए कैंप आयोजित कराने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद कहा गया है कि जिन पुलिसकर्मियों में एंटी बॉडी विकसित हो गई हैं वह प्लाज्मा दान करने के लिए तैयार रहें। यह एक तरह से बैंक के तौर पर विकसित किया जाएगा। जिलों की पुलिस लाइन और पीएसी में बीमार पुलिसकर्मियों के लिए बेड की व्यवस्था की गई है। इनमें अब तक 300 सामान्य और 50 ऑक्सीजन बेड की व्यवस्था हो चुकी है।पुलिस प्रवक्ता नीलेश आनंद भरणे ने बताया कि सभी जिलों को अपने यहां पर इन बेड की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। बेड की संख्या बढ़ने के बाद यदि बेहद जरूरी हुआ तो यहां पर पुलिसकर्मी ही नहीं बल्कि आम लोग भी भर्ती हो सकेंगे।

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