देहरादून: शासन ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने स्तर पर आक्सीजन टैंकरों का अधिग्रहण न करें। इस आदेश में कहा गया है कि यदि किसी जिले में आक्सीजन टैंकर की सप्लाई दिक्कत हो तो जिलाधिकारी खुद से टैंकर ंकी व्यवस्था नहीं करंेंगे। बल्कि उनको नोडल अधिकारी को बताना होगा। उसके बाद नोडल अधिकारी टैंकर की व्यवस्था के बारे में बताएंगे। लेकिन, सवाल यह है कि इस समय जबकि तेजी से काम करने की जरूरत है, इस प्रोसेस को लंबा क्यों किया जा रहा है।

प्रदेश में बढ़ते कोरोना संक्रमण के चलते आक्सीजन की मांग काफी तेजी से बढ़ रही है। केंद्र सरकार ने हर राज्य के आक्सीजन का कोटा तय करते हुए सभी निजी व सरकारी अस्पतालों में मांग के अनुसार आक्सीजन की आपूर्ति का जिम्मा प्रदेश सरकारों को सौंपा हुआ है। प्रदेश में यूं तो आक्सीजन की कोई कमी नहीं है लेकिन आक्सीजन को अस्पतालों तक पहुंचाने के लिए टैंकर जरूर कम पड़ रहे हैं। शासन ने आक्सीजन आपूर्ति के लिए सचिव उद्योग सचिन कुर्वे और टैंकरों के परिवहन व इनका अधिग्रहण करने के लिए सचिव परिवहन डा. रंजीत कुमार सिन्हा को नोडल अधिकारी बनाया है।

बावजूद इसके यह देखने में आ रहा है कि कई बार जिलाधिकारी अपने जिलों के अस्पतालों में आक्सीजन की कमी को देखते हुए टैंकरों का अधिग्रहण कर रहे हैं। शासन ने इसका संज्ञान लेते हुए सभी जिलाधिकारियों से ऐसा न करने को कहा है। सचिव डा. रंजीत कुमार सिन्हा द्वारा जारी आदेश के अनुसार जिला स्तर पर टैंकरों का अधिग्रहण नहीं किया जाएगा और आक्सीजन टैंकरों के परिवहन को भी निर्बाध रखा जाएगा।

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