देहरादून: राज्य में तबादला सत्र सरकार ने शून्य भले ही घोषित कर दिया हो, लेकिन प्रतिनियुक्ति का खेल अभी जारी है। इस तरह के दो मामले अब तक सामने आ चुके हैं। एक मामला ऊधमसिंह नगर का सामने आया था, जिसमें एक महिला शिक्षिका को प्रतिनियुक्ति पर पिथौरागढ़ जिले से सीधे मैदान में पहुंचा दिया गया। अब एक और मामला चर्चा में हैं। एलटी शिक्षक को प्रतिनियुक्ति पर सीधे श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय का सहायक कुलसचिव बना दिया गया। इसको लेकर उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत का बयान भी सामने आया है।

श्रीदेव सुमन विश्व विद्यालय में एलटी ग्रेड के शिक्षक को सहायक कुलसचिव बनाए जाने को लेकर जहां शिक्षकों में आक्रोश देखने को मिल रहा है। वहीं, शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय के उन दावों की भी अग्नि परीक्षा की घड़ी आ गई, जिसमें वह किसी शिक्षक को प्रतिनियुक्ति पर न भेजने के लिए एनओसी जारी करने की बात करतें हैं।

उच्च शिक्षा राज्यमंत्री धन सिंह रावत का कहना है कि प्रतिनियुक्ति पाना हर कार्मिक का अधिकार है। श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय में प्रतिनियुक्ति कि लिए 3 पद निकले थे, जिसमें एलटी से रजिस्टार बने शिक्षक देवेंद्र बिष्ट पूरी अहर्ता रखते हैं। अब ये तय शिक्षा विभाग को करना है कि वह प्रतिनियुक्ति पर भेजते हैं या नहीं। सवाल यह उठता है कि जब प्रतिनियुक्ति सभी कार्मिकों का अधिकार है, तो फिर प्रतिनियुक्ति अधिकांश उन्हीं शिक्षकों को क्यों मिलती है, जिनकी ऊंची पहुंच होती है। इस तरह के सवाल लगातार सोशल मीडिया में सामने आ रहे हैं।

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