चमोली-बीते सप्ताहांत लगातार हुई अतिवृष्टि से पर्वतीय इलाकों में भारी भूस्खलन ने लोगों के खेत -खलिहानों,आने जाने की सड़कों और पैदल रास्तों, पेयजल व्यवस्था और संचार व विद्युत आपूर्ति को तहस-नहस करके रख दिया था।तो अब खिल रही चटक धूप भी लोगों के लिए कम मुसीबतें खड़ी नहीं कर रही है। इससे बारिश के दरमियान हुए भूस्खलन के स्थानों पर और अधिक खतरा पैदा हो गया है।

इसी के चलते यहां मौणा गांव के ऊपर,ऊपरी गांवों से आये बरसाती नाले ने निकासी नहीं मिलने के कारण जमीन के अंदर समाकर भारी भूस्खलन कर डाला।से ग्रामीणों की कृषि भूमि को तहस-नहस कर डाला। जिससे मौणा गांव को भी भविष्य में बड़ा खतरा पैदा हो गया है।इस भूस्खलन का पानी और मलवा मौणा गांव के लोगों के घरों तलक भी पहुंचा तो लोगों में दहशत फ़ैल रही है।अब चूंकि बरसात का मौसम है तो बारिश के दौरान गांववासियों को भारी खतरे की आशंकाओं ने भी दो चार कर दिया है।

इसकी सूचना मिलते ही तहसीलदार सुरेन्द्र सिंह देव ने मौणा में हुए भूस्खलन का स्थलीय निरीक्षण करने के लिए क्षेत्रीय राजस्व उपनिरीक्षक राजेश्वरी रावत के नेतृत्व में टीम भेजी। जहां मौके पर नक्शा खसरा से लोगों की कृषि भूमि को भूस्खलन से हुए नुकसान का चिन्हीकरण किया गया है।पटवारी राजेश्वरी रावत ने कहा कि हमने लोगों को हुए नुकसान का आंकलन कर इसकी रिपोर्ट तैयार करने की कार्यवाही सुरू कर दी है तथा लोगों को नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा।कहा कि ग्रामीणों को भी बारिश के समय सतर्कता बरतने को भी कहा गया है।

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