देहरादून: कांग्रेस की वरिष्ठ नेती इंदिरा हृदयेश का निधन कांग्रेस के साथ ही राज्य के लिए भी बड़ी क्षति है। इंदिरा हृदयेश संसदीय मामलों की जानकार थीं, जिनकी कमी विधानसभा को भी खलेगी। सदन के भीतर अब दीदी शब्द की गूंज नहीं सुनाई देगी। उत्तराखंड की सियासत में इंदिरा हृदयेश का कद उन नेताओं में था, जो अपनी पार्टी के साथ ही विपक्षी दलों में भी खास प्रभाव रखती थीं।

यही वजह है कि कांग्रेस के सभी नेता उन्हे जहां दीदी बोलकर पुकारते थे। वहीं, सदन के भीतर हो या बाहर भाजपा के नेता भी उन्हें दीदी बोलकर पुकारते थें उनके निधन के बाद उत्तराखंड की सियासत में दीदी शब्द भी अब नहीं सुनाई देगा। खासकर विधानसभा सत्र के दौरान अब दीदी की गूंज नहीं सुनाई देगी। इंदिरा हृदयेश राजनीति में आने से पहले शिक्षकों की मांगों को लेकर मुखर रहा करती थीं। राजनीति में आने बाद भी शिक्षकों और कर्मचरियों की मांगों को लेकर हमेशा उनके पक्ष में खड़ी नजर आती थी।

इंदिरा हृदयेश 1962 से लेकर 2001 तक हल्द्धानी के ललित आर्य महिला इंटर काॅलेज की प्रधानाचार्य भी रहीं। आशासकीय स्कूल की प्रधानाचार्य होने के नाते आशासकीय स्कूलों के शिक्षकों की मांगो को लेकर वह मुखर रहती थीं। उनके जाने से जहां कांग्रेस को गहरा झटका लगा है। वहीं, उनकी कमी उत्तराखंड की सियासत में भी महसूत की जाती रहेगी।

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