हल्द्वानी : कल नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश निधन हो गया था। आज उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनके निधन से राज्य में 1 दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया है। उत्तराखंड की राजनीति में उनको राजनीति की पाठशाला भी कहा जाता था।

उन्होंने कांग्रेस के कई युवा नेताओं को राजनीति की बारीकियां सिखाई। राजनीति में उनकी पैंट और ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह उत्तराखंड में अकेली ऐसी मंत्री रहीं, जिनको लोक निर्माण विभाग का मंत्रालय सौंपा गया।

राज्य बनने के बाद से अब इंदिरा हृदयेश के कार्यकाल को छोड़कर किसी भी मुख्यमंत्री के कार्यकाल में लोक निर्माण विभाग का दायित्व किसी मंत्री को नहीं दिया गया। अब तक के सभी मुख्यमंत्रियों ने लोक निर्माण विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभाग को अपने पास ही रखा।

अपने कार्यकाल में लोक निर्माण मंत्री रहते हुए इंदिरा हृदयेश ने अपने विधानसभा हल्द्वानी में सड़कों का जाल बिछा दिया था। उसके बाद से आज तक हल्द्वानी विधानसभा में सड़कों पर कोई खास काम नहीं हो पाया। 2007 तक एनडी तिवारी सरकार के बाद किसी भी मुख्यमंत्री ने यह विभाग अपने किसी मंत्री को नहीं दिया।

उत्तराखंड की निर्वाचित सरकारों में केवल डॉ. इंदिरा ह्रदयेश के पास ही लोक निर्माण विभाग रहा। इसके बाद से लेकर वर्तमान तक सात मुख्यमंत्रियों ने मंत्रियों को बंटवारे के दौरान यह विभाग अपने पास ही रखा।

इस सूची में पूर्व सीएम भुवन चंद्र खंडूरी, डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, विजय बहुगुणा, हरीश रावत, त्रिवेंद्र सिंह रावत से लेकर वर्तमान सीएम तीरथ सिंह रावत का नाम जुड़ा है।

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