दरअसल उत्तराखंड विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल का ऐलान किया है। कर्मचारी सोमवार की रात 12 बजे से हड़ताल पर चले गए। इसके बाद बड़े पैमाने पर विद्युत विभाग का कामकाज ठप हो गया। विद्युत आपूर्ति भी बाधित होनी शुरु हो गई। चूंकि कर्मचाली हड़ताल पर हैं लिहाजा फॉल्ट ठीक करने वाला भी कोई नहीं और आपूर्ति बाधित है तो बाधित ही है।

 

उर्जा विभाग के कर्मचारियों की हड़ताल ने पूरे राज्य को परेशान कर दिया है। राज्य के अलग अलग जिलों में अलग अलग स्थानों पर विद्युत आपूर्ति बाधित हो गई है। राजधानी देहरादून में भी विद्युत कर्मियों की हड़ताल के चलते लोग परेशान हो रहें हैं। कई इलाकों में बिजली नहीं आ रही है। लोगों की दिनचर्या अव्यवस्थित हुई है। लोगों को पीने का पानी भी नहीं मिल पा रहा है। अधिकतर इलाकों में सुबह से ही बिजली आपूर्ति बंद है।

 

झगड़ा सरकार से, दुश्मनी जनता से

उर्जा विभाग के कर्मचारियों का विवाद सरकार से भले हो लेकिन दुश्मनी जनता से निकाली जा रही है। हैरानी इस बात की रही कि उत्तराखंड विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने बाकायदा एक पम्पलेट छपवाकर जनता से दुश्मनी निकाली। इस पम्पलेट में बाकायदा जनता को बताया गया कि आपको टार्च की व्यवस्था कर लेनी चाहिए। अपना मोबाइल चार्ज कर लेना चाहिए क्योंकि 12 बजे से हड़ताल होने वाली है। उत्तराखंड विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने जनता को परेशानी में डाल सरकार पर दबाव बनाने का काम किया।

 

सरकार भी मौन रही

उत्तराखंड विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान के बावजूद सरकार कोई सकारात्मक कदम नहीं उठा पाई। कर्मचारियों से बातचीत हुई लेकिन कोई हल नहीं निकल पाया। सरकार बेहद आवश्यक सेवाओं में से एक विद्युत आपूर्ति को बहाल रखने में सफल नहीं हो पाई।

 

सोशल मीडिया पर उठे सवाल

बिजली कर्मियों की हड़ताल को लेकर राज्य में जनता भी सवाल उठाती रही। सोशल मीडिया पर लोगों ने संयुक्त मोर्चा से पूछा कि मांगे मनवाने का ये कैसा तरीका है? लोगों ने संयुक्त मोर्चा को सलाह दी कि अच्छा होता कि विधायकों और मंत्रियों के घरों की बिजली गुल करते।

 

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