एक बात शीशे की तरह साफ है कि पुष्कर सिंह धामी फ्री हैंड खेल रहें हैं। अर्जुन की तरह मछली की आंख पर निशाना है और बाकी सब अफसाना है। पुष्कर सिंह धामी ने अपने 15 दिनों के शासन में यही साबित किया है कि अब सबका हिसाब किताब किया जाएगा। खासतौर पर अफसरशाही का। पुष्कर धामी ‘सबको बदल डालूंगा’ के अंदाज में तबादले की फाइलें बनवा रहें हैं। दरबारी ब्यूरोक्रेट्स के कंधों का बोझ कम करना ही मानों धामी ने अपना सूत्रवाक्य बना रखा हो। अब वो उनकी जगह युवा ब्यूरोक्रेट्स के कंधों का बोझ बढ़ाने में लगे हैं। सचिवालय में जो ब्यूरोक्रेट्स कभी सर्दियों की धीमी धूप जैसे कदमों में चलते नजर आते थे अब वो देहरादून की मॉनसूनी बारिश की मानिंद बरसने को बेताब हैं।

 

सबपर नज़र है

धामी ने मानों मठाधीशों का पूरा हिसाब किताब अपने दिमाग में पहले से ही फीड कर रखा हो। एक एक विभाग के बारे में धामी को या तो फीडबैक था या फिर इन 15 दिनों में फीडबैक ले लिया गया है। कौन क्या कर रहा है? किस टेबल पर काम हो रहा है और किस टेबल पर काम धीमा है ये धामी अब समझ चुके हैं। सीएम धामी ने अपनी पारी की शुरुआत में ही राज्य में ब्यूरोक्रेट्स के मुखिया को बदल कर अपने इरादे जता दिए थे। इंतजार था तो इस बात का कि सचिवालय में चौथे तल पर अपने पांव जमा चुके ब्यूरोक्रेट्स को किसी मुहूर्त में निपटाया जाता है। सीएम धामी ने सावन के पहले सोमवार को आखिरकार मुहुर्त निकाल ही लिया।

 

कुर्सी कहां टिकती है

त्रिवेंद्र के कार्यकाल से लेकर तीरथ तक के कार्यकाल में ब्यूरोक्रेट्स का जो धड़ा खुद को अमर समझ कर निश्चिंत हो चुका था उसे उसकी मौजूदा जिम्मेदारी से मोक्ष देकर इस सत्य से वाकिफ करा दिया गया कि कुछ भी चिरस्थायी नहीं है। कुर्सी तो खासकर। अब जब मुख्यमंत्रियों की कुर्सियां नहीं टिकती तो फिर अफसरों की क्या टिकेंगी।

 

टीम धामी करेगी धमाल!

मौजूदा वक्त में टीम धामी में युवा चेहरे अधिक दिख रहें हैं। फिलहाल विभागों के कामकाज में टीम धामी कुछ नया कर पाएगी इसकी उम्मीदे पहले से अधिक हैं। रवायती अंदाज में चल रही ब्यूरोक्रेसी को फेंटने के साथ ही सीएम ने एक एक कर मठाधीशों को साइडलाइन कर दिया है। दिलचस्प ये भी कि कई साइडलाइन अफसरों को मेन स्ट्रीम में भी ला दिया गया है। मसलन आनंद वर्धन को ही ले लीजिए। त्रिवेंद्र और तीरथ के दौर में सीनियर आईएएस आनंद वर्धन साइडलाइन हो गए थे लेकिन राज बदला तो आनंद ही आनंद हो गया। आनंद वर्धन को अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री बनाया गया। आईपीएस अफसर अभिनव कुमार को अपर सचिव मुख्यमंत्री बनाया गया। यानी परफेक्ट कॉम्बिनेशन। तजुर्बा और युवा जोश दोनों।

 

वैस ये तय मानिए कि जल्द ही और एक दर्जन ब्यूरोक्रेट्स के विभागों में तबादले होने वाले हैं। खासतौर पर फील्ड पोस्टिंग वाले ब्यूरोक्रेट्स के कामकाज में बदलाव होगा। बहुत मुमकिन है कि कई ऐसी पोस्टिंग दिख जाएं जिसकी उम्मीद किसी को न हो। फिर उत्तराखंड की सियासत में पिछले कुछ समय से हो भी ऐसा ही रहा है। जिसकी उम्मीद नहीं थी वही होता दिख रहा है।

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