देहरादून : ‘आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपया’ ये गाना उत्तराखंड पर सटीक बैठ रहा है. उत्तराखंड में 10 वर्षों की आमदनी ढाई गुना से कम बढ़ी तो वहीं खर्च तीन गुना से ज्यादा बढ़ा है जिससे उत्तराखंड वर्ष दर वर्ष कर्ज के बोझ तले दबता जा रहा है। खास बात यह भी है कि प्रदेश सरकार को यह कर्ज कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और इसी तरह के अन्य कामों के लिए लेना पड़ रहा है। ऐसे में उत्तराखंड अब उन राज्यों में शामिल है जिन्हें कर्ज के ब्याज के भुगतान के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है। राज्य को बंटवारे से पहले मिले कर्ज का भी बोझ उठाना पड़ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उत्तराखंड पर 27 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है। जिसे कैसे सरकार संभाल पाएगी ये कहना मुश्किल है।

10 सालों में उत्तराखंड में कुल राजस्व खर्च में 38470 करोड़ का हुआ इजाफा

दैनिक जागरण की खबर के अनुसार 2010-11 से 2020-21 तक करीब 10 सालों में उत्तराखंड में कुल राजस्व खर्च में 38470 करोड़ का इजाफा हुआ, जबकि आमदनी 10791 करोड़ तक ही पहुंच पाई है। 27,679 करोड़ रुपये के अंतर को खत्म करने के लिए सरकार को कोई प्लान नहीं सूझा और ये बढ़ता जा रहा है। कुल खर्च में सिर्फ कर्मचारियों के वेतन का हिस्सा 32.81 फीसद है। वेतन के साथ ही पेंशन के बढ़ते खर्च को संभालना राज्य के बस से बाहर होते जा रहा है जिससे विकास कार्यों पर असर पड़ रहा है।

वेतन पर 14951 करोड़, पेंशन पर 6297 करोड़ खर्च

वित्तीय वर्ष 2010-11 में राज्य का कर राजस्व 4405 करोड़ रुपये था। 2021 में यह बढ़कर 10,791 करोड़ रुपये हो गया है। राज्य की आमदनी में कोरोना महामारी का साया भी बरकरार है। 2018-19 में राज्य की आय 12,188 करोड़ तक पहुंच गई थी। 2019-20 में यह घटकर 11,513 करोड़ रह गई। 2020-21 में यह 10,791 करोड़ तक सिमट गई। आमदनी चवन्नी और खर्च रुपये जैसे हाल बन गए हैं। 10 वर्षों में आमदनी में महज 6386 करोड़ की वृद्धि हुई, जबकि इसी अवधि में खर्च बढ़कर 40,091 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। इसमें कर्मचारियों के वेतन पर 14951 करोड़, पेंशन पर 6297 करोड़ और ब्याज की अदायगी पर 5475 करोड़ खर्च हुए हैं।

इस अवधि में राज्य के आय के संसाधन करीब 2.45 गुना बढ़े, वहीं राजस्व खर्च बढ़कर 3.35 गुना हो चला है। कर्मचारियों के वेतन-भत्तों का खर्च तीन गुना बढ़ा है। पेंशन में वृद्धि 5.5 गुना हो गई। इस अंतर को पाटने के लिए ऋण लेना और फिर ब्याज की बढ़ती धनराशि का भुगतान राज्य की मजबूरी बन चुका है। संपर्क करने पर वित्त सचिव अमित नेगी ने कहा कि राज्य में गैर विकास मदों में खर्च तेजी से बढ़ रहा है। इससे विकास मदों के लिए धन जुटाना भारी पड़ रहा है।

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