पिथौरागढ़ः मजबूरी…। मजबूरी कई तरह की होती है। कुछ लोग हालातों से मबजूर होते हैं। लेकिन, कुछ लोग सिस्टम के कारण मजबूर होते हैं। ये ऐसी मजबूरी है, जिसे सरकार और सिस्टम दूर कर सकता है, लेकिन इस पर ध्यान देने के बजाय सिस्टम इसे अनदेखा कर देता है। इस कारण लोगों को मजबूरी में वो काम करना ही पड़ता है। ऐसी ही मजबूरी पिथौरागढ़ जिले के सीमांत धारचूला के व्यास और दारमा घाटी के लोगों के सामने खड़े है।

इनके सामने दैवीय आपदा झेलने की मजबूरी तो है, लेकिन आपदा के बाद भी इनको सिस्टम के आगे मजबूर होना पड़ता है। आपदा की तबाही के बाद लोगों को जीवन जीने के जरूरी राशन और रसोई गैस तक समय से नहीं मिल पाती है। जो मिलता भी है, उसकी कीमत बाजार भाव से करीब तीन गुना तक अधिक होती है। खाना बनाने की मजबूरी में लोगों को महंगे दामों पर गैस खरीदनी ही पड़ती है।

दैवीय आपदा झेल रहे गांवों में 2500 से लेकर 3000 हजार रुपये तक का एक सिलेंडर खरीदना पड़ता है। धारचूला से चीन सीमा के गांवों तक एलपीजी सिलेंडर पहुंचाने के लिए एक यात्री के समान किराया देना पड़ रहा है। इन दूरदराज के इलाकों में टैक्सियों के जरिए सिलेंडरों की आवाजाही है। किराया इतना अधिक है कि दूसरी जगहों पर करीब 900 रुपये में मिलने वाला एक सिलेंडर गांव पहुंचते-पहुंचते तीन गुना महंगा हो जाता है।

समझने के लिए चीन सीमा पर आखिरी गांव कुटी उदाहरण है। धारचूला से कुटी 120 किमी दूर है। यहां तक का यात्री किराया 1200 रुपये है। एक सिलेंडर के लिए भी इतना ही भाड़ा देना पड़ता है।वहीं, धारचूला से 80 किमी दूर गुंजी के लिए सिलिंडर का किराया 800 रुपये है। दारमा घाटी तक सिलेंडर पहुंचाने के लिए 600 रुपये देने पड़ते हैं। कई जगह सड़क बंद होने के कारण सिलेंडर ढोने के लिए मजदूर लगाने पड़ रहें हैं।

बिना सड़क सुविधा वाले गांवों तक सिलेंडर पहुंचाने के लिए भी लागत से अधिक भाड़ा चुकाना पड़ता है। बता दें की तवाघाट-सोबला सड़क 70 दिनों से बंद है। चौदास घाटी के 14 गांवों में तवाघाट से कांज्योति तक 10 किलोमीटर का चार्ज लगाकर करीब 2500 रुपये में गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है। कुटी के निवासियों ने बताया कि धारचूला- कुटी सड़क बंद होने से व्यास घाटी के सात गांवों में गैस सिलिंडर 2000 से 3000 रुपये तक में पहुंच रहा है।

लोगों का कहना है कि जदबुंगा, अमल्यानी, सेकली, मल्ला धुरा, तल्ला मल्ला खुमती, भुरभूरिया, कटोजिया टोक में सिलेंडर के लिए अतिरिक्त 300 रुपये भाड़े का भुगतान करना पड़ता है। यहां के लोगो और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सरकार से 2 सिलिंडर निशुल्क देने की मांग है। जिससे उनकी परेशानियां कुछ हद तक कम हो सके। लोगों का होना है कि यह इलाका आपदा की दृष्टि से अतिसंवेदनशील है।

आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए सिलेंडर लेना ही भारी है। ऐसे में उसे पिथौरागढ़ या धारचूला से व्यास और दरमा घोटियों तक पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। को कम से कम दो एलपीजी गैस सिलेंडर मुफ्त में देने चाहिए। सरकार सिलेंडर और अन्य रोज़मर्रा के सामान के दाम लगातार बढ़ाकर सीमांत के लोगों की परेशानी बढ़ा रही है।

खुमती प्रधान गोपाल सिंह ने बताया कि जड़बूंगा, अम्ल्यानी, सेकली, मल्ला धूरा, तल्ला मल्ला खुमती, भूरभुरिया, कटोजिया तोक में सिलिंडर का भाड़ा 300 रुपये अतिरिक्त देना पड़ता है। सोबला निवासी रामू रोकाया के अनुसार सोबला के आसपास के सभी गांवों में आजकल सिलिंडर 2500 रुपये और अन्य रोजमर्रा की खाद्य सामग्री तिगुने दामों में खरीदना पड़ रही है। रांथी के केशर सिंह ने बताया कि गलाती और रांथी में सिलिंडर के लिए 300 रुपये भाड़ा देना पड़ रहा है।

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