देहरादून: उत्तराखंड में तीन साल तक राज्यपाल रहने के बाद बेबी रानी मौर्य ने आज अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे ने लोगों को चौंका दिया है। इस्तीफा देने के पीछे उनको उत्तर प्रदेश की सक्रिय राजनीति में उतारना बताया जा रहा है। लेकिन, इस्तीफा दने के पीछे उत्तराखंड में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को भी माना जा रहा है।

2022 विधानसभा चुनाव का बिगुल लगभग बज चुका है। सभी राजनीतिक दलों ने चुनावी समर में ताल ठोक दी है। चुनाव आचार संहिता से पहले जहां भाजपा जन आशीर्वाद रैली कर रही है। वहीं, कांग्रेस परिवर्तन यात्रा निकाल रही है। अन्य राजनीतिक दल भी अपनी-अपनी रणनीति के हिसाब से बयानबाजी और दावे कर रहे हैं।

यह माना जा रहा है कि चुनाव से ठीक पहले राज्यपाल का इस तरह बदलना भी भाजपा की चुनावी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। यह भी हो सकता है कि राजनीति के किसी माहिर खिलाड़ी को राज्यपाल बनाकर उत्तराखंड भेज दिया जाए, जो राज्यपाल के रूप में तो काम करेंगे ही, साथ ही पार्टी को रणनीतिक रूप से भी मदद करेंगे।

हालांकि, भाजपा दावा कर रही है कि वो 60 प्लस सीटें जीतकर फिर सत्ता में वापसी करेगी, लेकिन जो सर्वे सामने आए हैं। उससे भाजपा को बहुत बड़ा बहुमत मिलता नजर नहीं आ रहा है। भाजपा-कांग्रेस के बीच फिलहाल के सर्वे में बराबर की टक्कर नजर आ रही है। इन स्थितियों में सरकार बनाने के वक्त राज्यपाल की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है।

ऐसे वक्त में राजनीति के माहिर खिलाड़ी ही काम आ सकते हैं, जो संवैधानिक जिम्मेदारी के साथ ही राजनीति के दावं-पेच लगातार सरकार और पार्टी को कुछ लाभ पहुंचा सके। इन्हीं कारणों के चलते राज्यपाल को बदलने की चर्चाएं भी आम हैं। हालांकि, असल रणनीति क्या है? यह कह पाना थोड़ा मुश्किल है। लेकिन, एक बात तो तय है कि भाजपा का यह फैसला चुनावी रणनीति का हिस्सा जरूर नजर आ रहा है।

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