खटीमा: उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान 1 सितंबर 1994 को हुए खटीमा गोलीकांड की 26वीं बरसी पर जहां प्रदेश के मुख्यमंत्री ने खटीमा पहुंचकर निर्माणाधीन शहीद स्मारक में शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। वहीं, उनके कार्यक्रम के बाद कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष भुवन कापड़ी ने भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ खटीमा की पुरानी तहसील में निर्माणाधीन शहीद स्मारक में आयोजित श्रधांजलि कार्यक्रम में पहुंचकर शहीद राज्य आन्दोलनकारियों को श्रद्धा सुमन अर्पित कर उनको नमन किया।

इस अवसर पर कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष भुवन कापड़ी ने कहा कि राज्य आंदोलनकरियो की शहादत की बदौलत ही आज हमें उत्तराखंड राज्य मिल पाया है। लेकिन बात अगर उत्तराखण्ड में राज्य आन्दोलनकारियो के सम्मान की करे तो उत्तराखंड राज्य के गठन के बाद कांग्रेस पार्टी ने ही राज्य आन्दोलनकारियो को सम्मान देने का जो काम किया है। वह किसी भी राजनीतिक दल ने नहीं किया है।

2002 में निर्वाचित कांग्रेस की एनडी तिवारी सरकार ने ही जेल गए आंदोलनकारियों को 50 हजार व नौकरी के साथ चिन्हीकरण कर आन्दोलनकारियों को सम्मान देने का काम किया। उसके बाद आई भाजपा सरकार ने सत्ता में आने के बाद राज्य असन्दोलनकारियों की अनदेखी की। लेकिन, 2012 में जब एक बार फिर कांग्रेस सरकार आई तो मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सभी राज्य आन्दोलनकारियांे को पेंशन दे राज्य आन्दोलनकारियों को सम्मान दिया। जबकि एक बार फिर भाजपा के मुख्यमंत्री ने खटीमा गोलीकांड में आकर राज्य आन्दोलनकारियो को निराश करने का काम किया है।

राज्य आन्दोलनकारियां को अपनी मांगों को लेकर निराश हाथ लगी है। इसके साथ ही कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष कापड़ी ने स्थानीय प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर कहा कि 27 सालों में पहली बार हुआ है कि खटीमा गोलीकांड की बरसी कार्यक्रम में कांग्रेस सहित किसी भी दल के प्रमुख को बुलाया नहीं गया है। जबकि हर वर्ष राजनीतिक दलों के प्रमुखों को इस कार्यक्रम में आमंत्रण दिया जाता था। इसलिए इस तरह के कार्यक्रमों का राजनीतिक करण करना गलत है। आज का श्रधांजलि कार्यक्रम केवल कुछ विशेष लोगों का कार्यक्रम बन कर रह गया है।

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