श्रीमहंत नरेंद्र गिरि का सोमवार को निधन हो गया है। पुलिस को मौके पर 8 पन्नों का सुसाइड नोट बरामद हुआ है जिसमे इसका जिम्मेदारी शिष्या आनंद गिरी समेत तीन लोगों को ठहराया गया है। हरिद्वार से आनंद गिरी को गिरफ्तार किया गया है साथ ही अन्य दो लोगों को भी हिरासत में लिया गया है और पूछताछ की जा रही है। आज उनको भू समाधि दी जाएगी।

वहीं बता दें कि इस के बाद बाघम्बरी गद्दी और उससे जुड़े लेटे हनुमान मंदिर का उत्तराधिकारी कौन होगा, यह तय करने का अधिकार अखाड़ा परंपरा के अनुसार सिर्फ और सिर्फ निरंजनी अखाड़े के पंच परमेश्वर को है। किसी वसीयत या नोट को नहीं। अखाड़े के पंच परमेश्वर प्रयागराज पहुंचने के बाद इस पर विचार करेंगे और अखाड़े के नियमों के मुताबिक जिसे योग्य पाएंगे, उसे उत्तराधिकार सौंप दिया जाएगा। यह कहना है कि श्रीपंचायती अखाड़ा निरंजनी के सचिव श्रीमहंत रविंद्र पुरी का।

उन्होंने यह बात श्रीमहंत नरेंद्र गिरि की ओर से अपनी मौत से पूर्व लिखे गए सुसाइड नोट में बिल्केश्वर महादेव मंदिर हरिद्वार के संयोजक बलवीर पुरी को उत्तराधिकारी घोषित करने संबंधी बात के सामने आने पर कही।श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने कहा कि अखाड़े में वसीयत के आधार कभी कोई कार्य नहीं होता। अखाड़े से जुड़ी कोई भी संपत्ति न तो किसी की निजी होती है, न उसका कोई मालिक ही होता है। सारी संपत्ति अखाड़े में निहित होती है और संत के ब्रह्मलीन होने पर अखाड़े में ही समाहित हो जाती है।

कहा कि पंच परमेश्वर अखाड़ा परंपरा के अनुसार जिसे योग्य समझते हैं, उसे ही इस संपत्ति के रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपते हैं। कहा कि पंच परमेश्वर सामने आने वाले सभी नामों पर चर्चा करेंगे और श्रीमहंत नरेंद्र गिरि की अंतिम इच्छा को भी उचित सम्मान दिया जाएगा। लेकिन, उत्तराधिकारी को लेकर अंतिम फैसला पंच परमेश्वर का ही मान्य होगा

श्रीमहंत नरेंद्र गिरि के निधन के बाद बाघम्बरी मठ-लेटे हनुमान मंदिर श्रीपंचायती अखाड़ा निरंजनी में निहित हो गया है। यह दोनों ही पहले भी अखाड़े की संपत्ति थे, जिनके देखरेख की जिम्मेदारी श्रीमहंत नरेंद्र गिरि को उनके पूर्ववर्ती के ब्रह्मलीन होने पर सौंपी गई थी।

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