दून विश्वविद्यालय की कुलपति डा. सुरेखा डंगवाल ने कहा है कि शिक्षा समाज व राष्ट्र के लिए है न कि आर्थिक लाभ मात्र के लिए।

आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित ‘नई शिक्षानीति परीक्षा एवं शिक्षण व्यवस्था’ विषय पर आयोजित कार्यशाला में डा. सुरेखा डंगवाल ने कहा कि शिक्षा को समाज से जोड़ना होगा। खासतौर पर शोध को लेकर गंभीर होने की आवश्यकता है। शोध को लेकर फंड की कमी नहीं होनी चाहिए। निजी व सरकारी शिक्षण संस्थान मिलकर शिक्षा के स्तर को उन्नत और विकसित कर सकते हैं।

वहीं आयुर्वेद विश्वविद्यालय कुलपति प्रो० सुनील कुमार जोशी ने कहा है कि आज पूरा विश्व भारत के दिए आयुर्वेद के ज्ञान को जानने के लिए उत्सुक है। पूरी दुनिया आयुर्वेद के ज्ञान को पाना चाहती है। प्रो जोशी ने कहा है कि उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय हिन्दी भाषा में शोध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

दून विश्वविद्यालय के डीन प्रो० एच.सी पुरोहित ने कहा कि असली शिक्षा विनय से लेकर समृद्धि तक प्रदान करती है। द्वितीय सत्र में कुलसचिव प्रो० उत्तम कुमार शर्मा जी ने शिक्षण संस्थान की व्यवस्था शिक्षक, विद्यार्थी, कर्मचारी, स्वच्छता सर्वागीण विकास खेलकूद इत्यादि विषय पर प्रकाश डाला। परीक्षा नियंत्रक डॉ० पी.के. गुप्ता नकलविहीन भ्रष्टाचार मुक्त परीक्षा कराने के विभिन्न उपायों पर चर्चा की। इसके साथ ही मोहन लाल टम्टा, डॉ० राजीव कुरेले, विवेक जोशी, आदि ने विभिन्न विषयों पर प्रकाश डाला। कार्यशाला का संचालन उप कुलसचिव डॉ० शैलेन्द्र प्रधान ने किया।

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