देहरादून। कहने को तो उत्तराखंड पुलिस मित्र पुलिस कहलाती है लेकिन देहरादून में पुलिस का रवैया इससे बिल्कुल उलटा है। बता दें कि बीते दिन एक युवक घर में चोरी की शिकायत लेकर कोतवाली पहुंचा लेकिन शिकायत दर्ज नहीं की गई। फिर वो आईएसबीटी चौकी गया लेकिन वहां से भी उसे निराश लौटना पड़ा। ये सिलसिला आठ दिन तक यूं ही चलता रहा। पीड़ित ने हार मानकर एसएसपी-डीआइजी जन्मेजय खंडूड़ी से मदद की गुहार लगाई जिसके बाद मामले में मुकदमा दर्ज किया गया।

मिली जानकारी के अनुसार 31 अक्टूबर को मोहन सिंह उर्फ विशाल निवासी वन विहार बाइपास पित्थूवाला अपने मकान में ताला लगाकर दीपावली की खरीदारी करने के लिए पलटन बाजार गए हुए थे। शाम करीब 4:15 बजे जब वह घर लौटे तो देखा कि गेट का ताला टूटा हुआ था। जब वह घर के अंदर दाखिल हुए तो देखा कि आलमारी का ताला टूटा हुआ है। उनके अनुसार आलमारी से 4 लाख रुपये, सोने के जेवर, लाकेट, दो टाप्स, 4 सोने की अंगूठी, 3 जोड़ी चांदी की पायल, छोटी बेटी के हाथ के कंगन गायब हैं। शिकायत दर्ज करवाने के लिए जब वह पटेलनगर कोतवाली पहुंचे तो वहां से उन्हें आइएसबीटी पुलिस चौकी भेज दिया गया।

जहां आईएसबीटी चौकी इंचार्ज ने शिकायत ले ली लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं किया। वह लगातार 8 दिन तक कोतवाली व चौकी चक्कर काटते रहे। लेकिन इसके बाद भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। शिकायतकर्ता ने 1 नवंबर को सीसीटीवी की फुटेज भी पुलिस को उपलब्ध करा दी थी। फुटेज में दो चोर सामान के साथ दिख रहे हैं। अब देखने वाली बात ये होगी कि पुलिस इस मामले को कितनी गंभीरता से जांच करती हैष

लेकिन सवाल ये है कि क्या पुलिस का ये रवैया सही है। लोगों को कई बार इंसाफ के लिए इधर से उधर भगाया जाता है। तब तक आऱोपी को भागने का और मौका मिल जाता है और वो कानून के हाथों से दूर भाग जाता है. मामले को गंभीरता से लेने की जरुरत है।

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